एक दिवसीय परीक्षा (One Day Exam, सामान्य-2)



 वर्तमान  में   विभिन्न  स्तर  के लोक सेवकों के  चयन के लिये  सेवाओं  की उपयोगिता  के  आधार पर  अलग  - अलग  तरह की प्रक्रिया  अपनायी जाती है।  सामान्यतः  इसको  दो  मुख्य भागों  में  बांटा  जा सकता है,   एक वह जहाँ  विषय    की      विशेषज्ञता  आवश्यक  होती है और  सेवाओ के उपयोग के दौरान  विषय  का ज्ञान  अति  आवश्यक है ।   यह   आप सभी    जानते  भी  हैं ,    उदाहरण के लिए    शिक्षक,  वैज्ञानिक, डाक्टर, इन्जीनियर  आदि   दूसरी परीक्षा है  वह जहाँ  सामान्य  जानकारी  आवश्यक है  चाहे  उसका  विषय कोई भी हो  लेकिन  सभी  विषयों  के प्रतिभागी इसमें  प्रतिभाग करते हैं।  और जिसकी   सामान्य  जानकारी  (  सामान्य गणित, सामान्य  विज्ञान, समान्य  ज्ञान व,मानसिक  योग्यता,   तथा  सामान्य  अंगेजी   आदि)   सभी  प्रतिभागियों को  होनी आवश्यक है। अब प्रश्न  यह   उठता है कि आप  चाहते  क्या हैं  या आपकी इच्छा  क्या है ? आपकी  इच्छाशक्ति  क्या है ?  यहाँ एक केवल  इच्छा  है , यदि  केवल  इच्छा  ही है  तो कोई  भी कार्य  मुश्किल  हो सकता है इसलिए  कि केवल इच्छा  से कार्य  नहीं  होता है  ,  लेकिन  इच्छा के  साथ  आपने  शक्ति  लगा  दी तो कार्य  आसान  हो जायेगा।  इच्छाशक्ति   मानस पटल का वह क्षेत्र है  जिसमें  किसी  भी वाह्य  परिस्थिति, कल्पना  व गलत  विचारों  का प्रभाव  नहीं  होता है और कार्य  को सफल बनाने के लिए  मेहनत जारी रहती है  । यह बात  आप अपने मन   से पूछ कर देख सकते हैं  यदि आप कोई कार्य  की योजना  बना  रहे  है और आपने  इस योजना के  बारे  में  किसी  दूसरे  व्यक्ति  से  बात की और यदि  उसने  उस पर कोई  नकारात्मक  टिप्पणी  कर दी तो डर से आपने  अपनी  योजना  ही स्थगित  कर दी या निरस्त  कर दी , बहुत से ऐसे  लोग  है,   तो यहाँ  आपकी इच्छाशक्ति  कमजोर है  । इच्छाशक्ति  की दुर्बलता  के कारण कई लोग  अपने आपको कमजोर  मानने  लगते हैं। यहां पर  यह इसलिए  बता रहा  हूँ  कि जिस भी परीक्षा  में  बैठे  चाहे वह एक दिनी परीक्षा  हो या चाहे  2 से 5 दिन  की  हो  मजबूत  संकल्प के  साथ  परीक्षा  में  बैठे।  अपने  अनुभव   share कर रहा हूँ    स्कूल  अनुश्रवण  की अवधि  में  मैं  किसी कक्षा  में  छात्रों  से पूछता  था कि इस साल  कक्षा 12 या 10 की बोर्ड  परीक्षा में  कितने  अंक लाओगे  तो कोई  कहता  75%, कोई 80% कोई 60%  तो मै कहता  कि 25%, 20%,और 40% तो पहले  ही आप अपने   मन  से बाहर निकाल  चुके हैं, तो  यह अधूरी तैयारी है,  जब कोई  काम  अधूरे  मन से करोगे तो  सफलता  संदिग्ध  होगी।  एक दिन की परीक्षा की बात कर लेते  हैं ,एक दिनी परीक्षा  सामान्यतः( 1) कम समय में  अधिक  प्रश्नों   का सही  उत्तर   लिखना ये   महत्वपूर्ण  बात   होती  है  (  2)    इस   प्रतियोगिता परीक्षा  में केवल उत्तीर्ण  नहीं  होना  होता है    अपितु  अपना  स्थान  पक्का  करना  होता है  (3) स्थान  पक्का  कब होगा  जब आपके  अंक सबसे अधिक  आयेगे  (4) आपके  अंक अधिक  कब आयेंगे  जब आपने  पूरे syllabus  के अनुसार  अच्छी  सी तैयारी  की है  आपको पूरा  syllabus  अच्छे से  याद है  और अधिक  स्कोर  किया है (5) क्या  आपने  अपना   आकलन  गत 5 वर्षों  के   paper के  आधार पर  कर  ईमानदारी से  कर दिया है ?  आकलन  के आधार  आपकी तैयारी  ठीक  है ,  यदि  दुविधा  है , ( वैसे  दुविधा  होनी नहीं  चाहिए),  तो फिर से (6) पूरे मनोयोग से  केवल  उन विषयों  (topic)  पर  तैयारी  करनी चाहिए। मन से और संकल्प  से   मेहनत  किसी भी  क्षेत्र  की  अवश्य  ही लाभदायक  होती है । एक दिवसीय परीक्षा  में  अभ्यास  अधिक  लाभकारी   होता  है   ।  practice  makes  man perfect  , चरेवेति चरेवेति । 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उत्तराखंड की स्थायी राजधानी (Permanent Capital of uttrakhand)

सिद्धसौड बड़मा (रुद्रप्रयाग )शिक्षा का केंद्र (center of education, siddhsour badma)

वृद्धावस्था( old age)